दास्तान - वक्त के फ़ैसले Complete Story

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RohitKapoor
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दास्तान - वक्त के फ़ैसले Complete Story

Unread post by RohitKapoor » 22 Oct 2014 17:17

दास्तान - वक्त के फ़ैसले (भाग-१)
लेखक: राज अग्रवाल
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ज़ूबी ने अपने चेहरे पर आते हुए अपने बालों को हटाया और कंप्यूटर में रिपोर्ट तैयार करने में जुट गयी। ज़ूबी को चार साल हो गये थे “रवि एंड देव” कंपनी के साथ काम करते हुए। “रवि एंड देव” देश की मानी हुई लॉ फ़र्म थी। ज़ूबी को ये नौकरी अपनी मेहनत और लगन से हासिल हुई थी। काम का बोझ इतना ज्यादा था कि कभी-कभी तो उसे १८ घंटे तक काम करना पड़ता था। वो पूरी मेहनत से काम कर रही थी और उसका लक्ष्य अपनी मेहनत से फ़र्म का पार्टनर बनने का था। उसकी गहरी नीली आँखें कंप्यूटर स्क्रीन पर गड़ी हुई थी कि उसकी सेक्रेटरी ने उसे आवाज़ दी, “ज़ूबी रवि सर अपने केबिन में तुमसे मिलना चाहेंगे।”

ज़ूबी ने मुड़कर सेक्रेटरी की तरफ़ देखा, “क्या तुम्हें पता है वो किस विषय में मिलना चाहते हैं?”

“नहीं मुझे सिर्फ़ इतना कहा कि मैं तुम्हें ढूँढ कर उनसे मिलने को कह दूँ” सेक्रेटरी ने जवाब दिया।

“शुक्रिया रजनी, मैं अभी उनसे मिल कर आती हूँ। मेरे जाने के बाद मेरे केबिन को बंद कर देना,” इतना कहकर वो कमरे में लगे शीशे के सामने अपना मेक-अप ठीक करने लगी। प्रोफेशन में होने के बावजूद ज़ूबी अपने पहनावे का और दिखावे का पूरा ख्याल रखती थी। उसने अपने पतले और सुंदर होठों को खोल कर उन पर हल्के गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगायी। ज़ूबी ने फिर अपने सिल्क के टॉप को दुरुस्त किया जो उसकी भारी और गोल चूचियों को ढके हुए था। २८ साल की उम्र में भी उसका बदन एक कॉलेज में पढ़ती लड़की की तरह था।

उसने अपनी हाई हील की सैंडल पहनी जो उसने अपने पैरों को आराम देने के लिए कुछ देर पहले खोल दी थी। वो रवि के केबिन की और जाते हुए सोच रही थी, “पता नहीं रवि सिर मुझसे क्यों मिलना चाहते हैं, इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है।”

ऑफिस के हाल से गुजरते हुए उसे पता था कि सभी मर्द उसे ही घुर रहे हैं। सबकी निगाहें उसके चूत्तड़ की गोलाइयों पे गड़ी रहती थी। वो हमेशा चाहती थी कि उसकी लंबाई पाँच फुट पाँच इंच से कुछ ज्यादा हो जाये। इसी लिए वो हाई हील की सैंडल पहना करती थी।

ज़ूबी केबिन के दरवाजे पर दस्तक देते हुए केबिन मे पहुँची। रवि ने उसे बैठने के लिये कहा।



“ज़ूबी! मिस्टर राज के केस में कुछ प्रॉब्लम क्रियेट हो गयी है” रवि ने कहा।

ज़ूबी रवि की बात सुनकर चौंक पड़ी। मिस्टर राज हज़ारों करोड़ रुपैयों की एक मीडिया कंपनी के मालिक थे। मिस्टर राज की कंपनी रवि की कंपनी के बड़े ग्राहकों में से थी बल्कि उनकी सिफारिश से भी कंपनी को काफी बिज़नेस मिलता था। ज़ूबी पिछले एक साल से मिस्टर राज की कंपनी के टीवी और रेडियो स्टेशन के लायसेंस को सरकार से रीन्यू (नवीकरण) के काम में लगी हुई थी।

“ज़ूबी मुझे अभी-अभी खबर मिली है कि सरकार शायद मिस्टर राज की रीन्यूअल ऐप्लीकेशन को रद्द कर दे... कारण उनकी ऐप्लीकेशन में बहुत सी बतों का खुलासा करना रह गया है” रवि ने घूरते हुए उसकी तरफ़ देखा।

ज़ूबी घबरा गयी। उसने पूरे साल भर मेहनत करके सब ऐप्लीकेशंस तैयार की थी। उसे याद नहीं आ रहा था कि उससे गलती कहाँ हुई है पर रवि के गुस्से से भरे चेहरे से पता चल रहा था कि गलती कहीं न कहीं तो हो चुकी है।

रवि ने उसे थोड़ा नम्र स्वर में कहा, “देखो ज़ूबी मुझे पता है कि तुमने काफी मेहनत से ये ऐप्लीकेशंस तैयार की थी। मैं हमेशा से तुम्हारी मेहनत और लगन का कायल रहा हूँ। पर कभी कभी गलतियाँ घर चल कर आ जाती हैं।”

ज़ूबी जानती थी कि ये बात कहाँ जाकर खत्म होगी, “सर अगर इस गलती का दंड किसी को मिलना है तो वो मुझे मिलना चाहिए, क्योंकि सही ऐप्लीकेशंस तैयार करने की जिम्मेदारी मेरी थी और मैं ही अपना काम अच्छी तरह नहीं कर पायी।”

ज़ूबी ने हिम्मत से ये कह तो दिया था, पर वो जानती थी कि इससे उसका भविष्य बर्बाद हो जायेगा। जो सपने उसने इस कंपनी के साथ रहते हुए देखे थे वो सब चूर हो जायेंगे और शायद उसे किसी दूसरी कंपनी में भी नौकरी नहीं मिलेगी।

तभी रवि ने उसपर दूसरी बिजली गिरायी।

“ज़ूबी जैसे तुम्हें पता है कि ऐप्लीकेशन पर तुम्हारे और मिस्टर राज के दस्तखत हैं, डिपार्टमेंट वाले सोच रहे हैं कि जानबूझ कर ऐप्लीकेशन में कुछ बातें छिपायी गयी हैं। और इस वजह से तुम दोनों को हिरासत में भी लिया जा सकता है और मुकदमा भी चल सकता है।”



ज़ूबी ये सुन कर दहल गयी। उसकी आँखों में दहशत के भाव आ गये। उसकी बदनामी, गिरफतारी, मुकदमा सब सोच कर वो डर गयी। कोई बात खुलासा करना रह गयी वो फ्रॉड कैसे हो सकता है। “सर आप तो जानते हैं कि मैंने ये सब जानबूझ कर नहीं किया, गलती ही से रह गया होगा।” वो रोने लगी, “सर आप ही बतायें कि मैं क्या करूँ?”

“मैं जानता हूँ कि तुम एक मेहनती और इमानदार औरत हो, पर पहले हमें मिस्टर राज की चिंता करनी चाहिए। अगर सरकार ने हमारी फ़र्म और मिस्टर राज को जिम्मेदार ठहरा दिया तो हम सब बर्बाद हो जायेंगे।” रवि ने अपनी बात जारी रखी, “एक काम करो... तुम अपने केबिन में जाकर शांति से बैठ जाओ, और इस बात का जिक्र किसी से भी नहीं करना। ये बहुत ही नाजुक मामला है... अगर एक शब्द भी लीक हो गया तो हम बर्बाद हो जायेंगे।”

ज़ूबी ने सहमती में अपनी गर्दन हिला दी।

“अपने केबिन में जाओ और मेरे फोन का इंतज़ार करो। मैं मिस्टर राज से कॉन्टेक्ट करता हूँ और उन्हें सारी बात समझाता हूँ... फिर सोचते हैं कि हमें क्या करना चाहिए” रवि ने कहा।

ज़ूबी वापस अपने केबिन मे पहुँची। उसका दिमग काम नहीं कर रहा था कि वो क्या करे। उसे पता नहीं था कि अगर वो गिरफ़्तार हो गयी तो उसका मंगेतर आगे उससे रिश्ता रखेगा कि नहीं। वो अपनी कुर्सी पर बैठ कर बाहर देखने लगी। उसे महसूस हुआ कि उसका शरीर डर के मारे काँप रहा था।

करीब एक घंटे के लंबे इंतज़ार के बाद रवि का फोन आया, “ज़ूबी राज एक कॉनफ्रेंस के सिलसिले में होटल अंबेसडर के सुइट नंबर १५०४ में है। उसने तुम्हें तुरंत ऐप्लीकेशन की कॉपी लेकर बुलाया है। तुम तुरंत चली जाओ... मैं थोड़ी देर में आता हूँ।”



“ठीक है सर! मैं अभी चली जाती हूँ।”

फोन पर थोड़ी देर खामोशी छायी रही।

“ज़ूबी तुम्हें पता है ना कि ये मीटिंग हमारी फ़र्म के लिये कितनी महत्वपूर्ण है।” थोड़ी और खामोशी के बाद, “और तुम्हारे लिए भी।”

ज़ूबी ने रवि को बताया कि उसे पता है।

काँपती हुई ज़ूबी ने फाइल उठाई और होटल अंबेसडर की ओर चल दी।

करीब डेढ़ घंटे की बहस के बाद भी ज़ूबी मिस्टर राज को ये नहीं समझा पायी कि उससे गलती कैसे और कहाँ हुई। ये बात राज को झल्लाय जा रही थी और आखिर वो गुस्से में बरस पड़ा। “क्या तुम मुझे ये बताने की कोशिश कर रही हो कि तुम्हें ये नहीं पता कि क्या और कौनसी बातें ऐप्लीकेशन मे छूट गयी हैं। मैं ही बेवकूफ़ था जो इतने महत्वपूर्ण काम पर “रवि एंड देव” पर भरोसा किया। क्या तुम कोई जवाब दे सकती हो?” राज गुस्से में जोर से बोला।

ज़ूबी की आँखों में आँसू आ गये। आज तक राज ने उसे बहुत इज्जत और अच्छे व्यवहार से ट्रीट किया था। ४५ साल का राज एक कसरती बदन का मर्द था। वो गुस्से में अपने हाथ का मुक्का बना कर दूसरी हथेली पे मार रहा था जैसे कि एक ही वार में ज़ूबी को मार गिरायेगा।

राज ज़ूबी की ओर देख कर अपने आप से कह रहा था, “क्या बदन है इसका। भारी-भारी चूचियाँ और इतनी पतली कमर। पता नहीं बिस्तर में कैसी होगी।” जब ज़ूबी कागज़ों से भरी टेबल पर झुकी तो राज को उसकी लंबी टाँगें और बड़े-बड़े कुल्हों की झलक मिली। “थोड़ी देर में ही इसकी गाँड ऐसे मारूँगा कि ये याद रखेगी।”

“ज़ूबी! मैंने अपने क्रिमिनल लॉयर से बात कर ली है, उसका कहना है कि अगर मैंने तुम पे और तुम्हारी फ़र्म पे भरोसा करके साइन किये हैं तो मुझ पर कोई इल्ज़ाम नहीं आता है। अब तुम फँस चुकी हो... मैं नहीं। मुझे टेंशन है कि मेरा करोड़ों का नुकसान हो जायेगा।” राज ने उसे घूरते हुए कहा।

“मैं समझ सकती हूँ सर” ज़ूबी अपनी गर्दन झुकाते हुए बोली।

“क्या समझती हो तुम, कि तुम्हारी जैसी नासमझ वकिल की वजह से मैं अपना करोड़ों का नुकसान होने दूँगा। याद रखना तुम कि अगर मेरा एक पैसे का भी नुकसान हुआ तो मैं तुम्हारी पूरी लॉ फ़र्म बंद करवा दूँगा।”

“सर मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ।” ज़ूबी गिड़गिड़ाते हुए बोली, “सर कुछ भी जो आप कहें।”

राज थोड़ी देर तक कुछ सोचता रहा, “ठीक है मैं अपने क्रिमिनल लॉयर से बात करता हूँ कि वो तुम्हें कैसे बचा सकता है। जब तक मैं बात करता हूँ, तुम एक काम करो... अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ और मेरे लंड को चूसो... सिर्फ़ इसी तरह तुम मेरी मदद कर सकती हो।”

ज़ूबी पत्थर की बुत बन कर खड़ी थी। राज फोन पर अपने वकिल से बात कर रहा था, “हाँ वो तो फँसेगी ही पर उसकी फ़र्म को भी काफी नुकसान होगा, क्या कोई तरीका नहीं है कि इन सबसे छुटकारा मिल सके?”

“थोड़ा उसकी उम्र और उसके भविष्य का ध्यान दो, बेचारी मर जायेगी। उसकी फ़र्म के बारे में सोचता हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए। हाँ वो इस समय मेरे पास ही खड़ी है।”

“क्या तुम ये कहना चाहते हो कि अब उसका और उसकी फ़र्म का भविष्य मेरे हाथ में है...? तो ठीक है मैं सोचुँगा कि इस लड़की को इस समस्या से बचाना चाहिए कि नहीं।”

राज ज़ूबी को घुरे जा रहा था, जैसे वो उसके आगे बढ़ने का इंतज़ार कर रहा हो। राज होटल की कुर्सी पे अपनी दोनों टाँगों को फैलाये बैठा था।

अपने आपको भविष्य के सहारे छोड़ते हुए ज़ूबी ने अपनी ज़िंदगी की राह में अपना पहला कदम बढ़ा दिया। उसने गहरी साँस लेते हुए अपने हाथ अपने टॉप के ऊपर के बटन पर रखे और बटन खोलने लगी। थोड़ी ही देर में उसका टॉप खुल गया और उसने उसे अपने कंधों से निकाल कर उसे उतार दिया। फिर उसने अपनी स्कर्ट के हुक खोल कर उसे नीचे गिरा दिया। अपनी हाई हील्स की सैंडल निकाले बगैर उसने स्कर्ट को उतारा और सैंडलों के अलावा सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में राज के सामने खड़ी थी।

ज़ूबी राज को देख रही थी कि उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया हो पर वो वैसे ही अपनी कुर्सी पर बैठा रहा।

ज़ूबी सोच रही थी कि आगे वो क्या करे कि इतने में राज ने फोन के माउथ पीस पर हाथ रख कर कहा, “अब तुम किसका इंतज़ार कर रही हो। जल्दी से अपनी पैंटी और ब्रा उतार के मेरे पास आओ।”

ज़ूबी ने अपनी ब्रा के हुक खोल कर अपनी ब्रा उतार दी। उसकी गोल -गोल चूचियाँ बाहर निकल पड़ी। फिर उसने अपनी पैंटी नीचे कर के उतार दी। उसने देखा कि राज उसकी चूत को घूर रहा था। उसने अपने मंगेतर के कहने पर कल ही अपनी चूत के बल साफ किये थे। उसे शरम आ रही थी कि आज कोई मर्द उसकी चूत को इस तरह घूर रहा है।

राज अभी भी फोन पर बात कर रहा था। वो अपनी कुर्सी से उठा और ज़ूबी को देख कर अपनी पैंट की ज़िप की ओर इशारा किया। ज़ूबी उसके पास आ घुटनों कल बैठ गयी। फिर उसने उसकी पैंट के बटन खोले और उसके सुस्त पड़े लंड को अपने हाथों में ले लिया। फिर अपने होठों को खोल कर अपनी जीभ से उसके लंड के सुपाड़े को चाटने लगी।

ज़ूबी ने आज से पहले अपने मंगेतर के सिवाय किसी और के लंड को नहीं चूसा था। अपने मंगेतर का भी सिर्फ़ एक बार जब वो काफी नशे में हो गया था और उसे चूसने की जिद की थी। पर आज उसके पास कोई चारा नहीं था। उसने अपना पूरा मुँह खोल कर राज के लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ का स्पर्श पाते ही लौड़े में जान आ गयी और वो ज़ूबी के मुँह में पूरा तन गया।

राज ने अपनी पैंट नीचे खिसका दी। ज़ूबी एक हाथ से उसके लंड को पकड़े हुए थी और अपने मुँह को ऊपर नीचे कर रही थी जैसे कोई लॉलीपॉप चूस रही हो। राज हाथ बढ़ा कर उसकी चूचियों के निप्पल को अपने अंगूठे और अँगुली में ले कर भींचने लगा। उसके छूते ही निप्पल में जान आ गयी और वो खड़े हो गये।

राज ने फोन पर बात करना जारी रखा।

“ज़ूबी खान नाम है उसका। हाँ यार तुम जानते हो उसे... वही जिसने लॉ परीक्षा मे स्टेट में टॉप किया था। हाँ वही...। अरे वो यहीं है इस वक्त... मेरे लंड को चूस रही है... तुम्हें क्या लगता है... मैं मजाक कर रहा हूँ...? थोड़ी देर में मैं उसकी चूत चोदने वाला हूँ।”

राज की बातें सुनकर ज़ूबी का चेहरा शर्म से लाल हो गया। फिर भी वो जोरों से उसके लंड को चूस रही थी। वो जानती थी कि उसके पास बस एक यही उपाय है अपने आप को इस मुसीबत से बचाने का। उसने लंड चूसना जारी रखा।

राज ने फोन नीचे रखा और अपने दोनों हाथ ज़ूबी के सिर पर रख कर अपने लंड को और अंदर उसके गले तक डाल दिया। उसकी बढ़ती हुई साँसों के देख कर ज़ूबी समझ गयी कि उसका लंड अब पानी छोड़ने वाला है।

“हाँआँआँआँ चूऊऊसो ओहहहहह और जोर से चूसो” राज अपने लंड को और अंदर तक घुसेड़ कर बड़बड़ा रहा था।

ज़ूबी एक हाथ से उसके लंड की गोलियों को सहला रही थी और दूसरे हाथ से उसके लंड को पकड़े चूस रही थी। थोड़ी देर में राज का लंड अकड़ना शुरू हो गया। राज ने अपने दोनों हाथों का दबाव ज़ूबी के सिर पर रख कर अपने लौड़े को और अंदर गले तक डाल दिया और अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।

ज़ूबी ना चाहते हुए भी उसके लंड से निकला पूरा पानी गटक गयी। राज अपने लंड को उसके मुँह मे तब तक अंदर बाहर करता रहा जब तक कि उसका लंड थोड़ा ढीला नहीं पड़ गया। ज़ूबी उसके लंड को अपने मुँह से निकालने को डर रही थी कि कहीं वो नाराज़ ना हो जाये पर राज ने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया। उसके लंड के निकलते ही उसके पानी की धार ज़ूबी के चेहरे से होती हुई उसकी छाती और टाँगों पर चू पड़ी।

तभी फोन की घंटी बजी और राज फोन उठा बात करने लगा। बात करते हुए उसने ज़ूबी को उसके कंधों से पकड़ कर खड़ा कर दिया। राज ने उसे घुमा कर इस तरह खड़ा कर दिया कि ज़ूबी की पीठ उसकी तरफ़ थी।

फोन पर बात करते हुए राज पीछे से अपने हाथ उसकी छाती पर रख कर उसके मम्मे मसल रहा था। ज़ूबी ने महसूस किया की उसका लंड उसकी गाँड की दरार पर रगड़ खा रहा है। राज उसके कान में धीरे से बोला, “जाओ जाकर बिस्तर पर लेट जाओ, अब मैं तुम्हें चोदूँगा।”

जैसे ही ज़ूबी बिस्तर की ओर बढ़ी, राज उसके बदन को घुरे जा रहा था। क्या पतली कमर है और क्या गोल गोल चूत्तड़। उसने ऐसे बदन जिम में कई देखे थे। उसके भरे चूत्तड़ों को देख कर राज के मुँह में पानी आ रहा था, “आज मैं इसकी गाँड मार के रहुँगा” वो सोच रहा था।

ज़ूबी जैसे ही बिस्तर पर लगे कवर को हटाकर उसमें घुसने लगी तो राज बोला, “ज़ूबी तुम बेड के ऊपर नंगी ही लेटी रहो... मैं तुम्हारे नंगे बदन को देखना चाहता हूँ और अपने सैंडल मत उतारना।”

राज उसे घुरे जा रहा था। वो जानता था की ज़ूबी आज हर वो काम करेगी जो वो कहेगा। उसकी उभरी और भरी हुई चूचियाँ फिर एक बार उसके लंड में जान फूँक रही थी।

पिछले आधे घंटे से राज ज़ूबी के ऊपर लेटा हुआ अपने भारी लंड को उसकी चूत में अंदर बाहर कर रहा था। ज़ूबी की दोनों टाँगें राज की कमर से लिपटी हुई थी। राज अपने हाथों से उसके दोनों चूत्तड़ों को पकड़े हुए था और अपने लंड को आधा बाहर निकालते हुए पूरी ताकत से उसकी चूत में पेल रहा था।

ज़ूबी के दोनों हाथ राज की पीठ पर थे और राज जब पूरी ताकत से धक्का लगाता तो ज़ूबी को अपना शरीर पिसता हुआ महसूस होता। वो दिवार पर लगे शीशे में देख रही थी की राज का भारी शरीर कैसे उसके नाज़ुक बदन को रौंद रहा था।

मन में डर और इस बे-इज्जती के बावजूद अब उसके शरीर और टाँगों ने विरोध करना छोड़ दिया था। चुदाई इतनी देर चल रही थी की अब उसे भी आनंद आ रहा था। वो भी अपने कुल्हे उछाल कर उसका साथ दे रही थी। उसे ऐसा लग रहा था की राज का लंड नहीं बल्कि उसके मंगेतर का लंड उसे चोद रहा है। जब भी राज का लंड उसकी चूत की जड़ पर ठोकर मारता तो उसके मुँह से सिस्करी निकल रही थी, “ओहहहहहहह आहहहहहहह”

आखिर में राज का शरीर अकड़ने लगा और उसने ज़ूबी को जोर से बाँहों में भींचते हुए अपना लंड पूरा अंदर डाल कर अपना पानी छोड़ दिया। ज़ूबी ने भी सिस्करियाँ भरते हुए उसके साथ ही पानी छोड़ दिया।

राज थोड़ी देर उसके बदन पर लेटा अपनी साँसों को काबू में करता रहा और फिर पलट कर बिस्तर पर लेट गया। जैसे ही राज उसके शरीर से हटा, ज़ूबी बिस्तर से लड़खड़ाते हुए उठी और अपने कपड़े ले कर बाथरूम में घुस गयी।

ज़ूबी अपने कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर आयी तो देखा की राज अभी भी बिस्तर पर नंगा लेटा है और वो टीवी का रिमोट पकड़े चैनल बदल रहा है।

“देखो इसे?” राज ने कहा।

ज़ूबी की नज़रें जैसे ही टीवी स्क्रीन पर पड़ी तो उसने देखा की वो उसकी और राज की चुदाई की फ़िल्म थी। राज ने उसके साथ चुदाई का पूरा वीडियो टेप बना लिया था।

“ज़ूबी” उसने कहा, “आज से मैं “रवि एंड देव” कंपनी को अपने इशारों पर नचा सकता हूँ और साथ ही आज से तुम्हें हर वो काम करना है जो मैं चाहुँगा।”

ज़ूबी ये टेप देख कर घबरा गयी थी और अपनी किस्मत को कोस रही थी कि वो कहाँ तो एक सफ़ल वकील बनने आयी थी और अब हालात उसे एक वेश्या बना रहे थे।

“तुम अपना फोन नंबर, घर का पता और मोबाइल नंबर लिख कर दे दो और जब मैं तुम्हें बुलाऊँ, तुम्हें आना पड़ेगा” राज ने उसे घूरते हुए कहा।

ज़ूबी समझ गयी थी कि उसके पास कोई चारा नहीं था, इसलिए उसने जल्दी से सब लिखा और लगभग भागते हुए कमरे से बाहर चली गयी।

राज के होठों पर एक सफ़ल मुस्कान थी।

दूसरे दिन ज़ूबी अपने ऑफिस पहुँच कर मिस्टर रवि से मिली, “सर हालातों को देखते हुए मिस्टर राज के साथ कल की मीटिंग अच्छी गयी। मुझे लगता है की समस्या का कोई ना कोई हल निकल ही आयेगा।”

जो कुछ भी उसके और राज के बीच हुआ था वो उसने नहीं बताया और ना ही टेप के बारे में। ये भी नहीं बताया की राज का फोन सुबह आया था और उसने कहा था की आज से जब भी वो उससे मिले तो ब्रा और पैंटी ना पहने।

“मेरी मिस्टर राज के साथ थोड़ी देर में मीटिंग होने वाली है। ज़ूबी तुम यहीं ऑफिस में रहना... हो सकता है मिस्टर राज को तुम्हारी ज़रूरत पड़े” रवि ने उससे कहा।

ज़ूबी डरी और सहमी हुई अपने केबिन मे पहुँची। उसे राज के रुतबे के बारे में मालूम था और वो जानती थी की अगर उसने उसकी बात नहीं मानी तो वो कुछ भी कर सकता था।

अपने केबिन में दाखिल होने से पहले वो साथ में लगे बाथरूम मे गयी और अपनी ब्रा और पैंटी उतार दी। उसने दीवार पर लगे शीशे मे अपने आप को देखा तो शर्मा गयी। उसके सिल्क के टॉप में से उसके मम्मे साफ़ झलक रहे थे। उसके निप्पल साफ़ टॉप में से बाहर को निकालते दिखायी पड़ रहे थे।

ज़ूबी जल्दी से अपनी ब्रा और पैंटी अपने हाथों में लिए दौड़ती हुई अपने केबिन में वापस आ गयी। केबिन में आने के बाद उसने अपना बिज़नेस कोट पहन लिया जिससे उसके टॉप में से छलकती चूचियों को ढांपा जा सके।

ज़ूबी अपनी कुर्सी पर बैठ कर काम करने की कोशिश कर रही थी पर उसका सारा ध्यान मिस्टर राज और मिस्टर रवि के बीच चल रही मीटिंग पर था। थोड़ी देर बाद मिस्टर रवि का फोन आया, “ज़ूबी मिस्टर राज तुमसे अभी तुम्हारे केबिन में मिलना चाहेंगे।”

“ठीक है सर... उन्हें भेज दीजिए, मैं इंतज़ार कर रही हूँ” ज़ूबी ने जवाब दिया।

ज़ूबी अपनी कुर्सी पे चिंतित बैठी थी। हज़ारों ख्याल उसके दिमाग में घूम रहे थे। फिर भी वो पूरी कोशिश कर रही थी कि वो चेहरे से चिंतित ना दिखे। थोड़ी देर में उसके केबिन के दरवाजे पर दस्तक हुई और उसकी सेक्रेटरी मिस्टर राज के साथ अंदर आयी। राज के पीछे एक और व्यक्ति केबिन में दाखिल हुआ जिसे देख कर एक बार के लिये ज़ूबी को थोड़ी राहत मिली।

राज ने उस व्यक्ति को दरवाज़ा बंद करने के लिये कहा और ज़ूबी से उसका परिचय कराया। “ज़ूबी ये मिस्टर अमित मेरे दोस्त हैं जो लायसेंस रीन्यूअल डिपार्टमेंट में काम करते हैं। इन्होंने ही हमारी ऐप्लीकेशन की गल्तियों को पकड़ा है।” ज़ूबी ने एक मुस्कान के साथ उससे हाथ मिलाया।

मिस्टर अमित दिखने में ही एक सरकरी मुलाज़िम लग रहा था। पुराने स्टाइल के कपड़े, बालों में मन भर तेल और नाक पर मोटे काँच का चश्मा। पर अपनी पोज़िशन की वजह से थोड़ा कठोर स्वभाव का लग रहा था। ज़ूबी ने देखा की उसकी पैंट जो उसके पेट के नीचे लटक रही थी, शायद तब खरीदी गयी थी जब उसका साइज़ ३४ था जो कि आज लगभग ४० था।

राज ने धीरे से ज़ूबी से कहा, “ज़ूबी हम जिस विषय पर बात करने वाले हैं उसमें थोड़ा समय लग सकता है।”

ज़ूबी ने अपनी सेक्रेटरी को फोन लगाया, “मेरे आने वाले हर फोन को रोक देना, मैं मिस्टर राज और मिस्टर अमित के साथ एक जरूरी मीटिंग में हूँ।”

“ज़ूबी मिस्टर अमित चाहते हैं की हम तीनों मिलकर इस समस्या का हल निकाल लें। पर किसी को मालूम नहीं होना चाहिए की हमने साथ में मुलाकात की है। और मैंने इन्हें ये भी बता दिया है की सारी ऐप्लीकेशन तुमने ही तैयार की हैं।” राज ने मीटिंग शुरू करते हुए कहा।

करीब एक घंटे की बहस के बाद ज़ूबी को पता चला कि अगर लायसेंस रीन्यू नहीं हुए तो राज की कंपनी को कितना घाटा हो सकता है। मिस्टर अमित अगर नयी ऐप्लीकेशन से पुरानी वाली बदल भी देते हैं तो इन्हें अपने और साथी को मिलाना होगा। जैसे-जैसे समय गुज़र रहा था, राज के चेहरे पर झल्लाहट के भाव आते जा रहे थे।

“अमित ज़ूबी को हमारी परिस्थिति के बारे में अच्छी तरह मालूम है। उसे ये भी मालूम है की गलती उससे हुई है। वो अच्छी तरह जानती है की मैं इसकी कंपनी को बर्बाद कर सकता हूँ पर इन सबसे मेरा जो घाटा होगा वो तो पूरा नहीं होगा ना” राज का गुस्सा साफ़ दिखायी दे रहा था।

“ज़ूबी इस कंपनी के बोर्ड पर है और हमारी हर तरह से सहायता करने को तैयार है... है न ज़ूबी।” ज़ूबी ने हाँ में अपनी गर्दन हिला दी।

राज ने अपना अगला कदम बढ़ाया। वो खड़ा होकर ज़ूबी के डेस्क के पास चहल कदमी करने लगा, “अमित हमें इस काम को अंजाम देना है। तुम्हें अच्छी तरह पता है की कैसे अंजाम दिया जाता है।”

फिर उसने ज़ूबी की तरफ़ देखा, “ज़ूबी जरा खड़ी हो जाओ।”

ज़ूबी काँपती टाँगों पर उसकी बात मानते हुए खड़ी हो गयी।

राज चलते हुए ज़ूबी के पीछे आ गया और अमित उसे घुरे जा रहा था। उस करोड़पति ने ज़ूबी का कोट उतार दिया और उसके टॉप में से झलकती चूचियाँ साफ़ दिखायी देने लगी।

“अमित मैंने इस गुड़िया से कहा था की आज वो ब्रा नहीं पहने।” ज़ूबी के निप्पल अचानक ही तन गये थे। राज ने पीछे से उसके टॉप की ज़िप खोल दी और ज़ूबी पत्थर की मुरत बनी सहमी सी खड़ी थी। ज़ूबी की निगाहें अमित के चेहरे पर टिकी थी जो हैरत से उसकी और घूर रहा था।

राज ने ज़ूबी के टॉप को उसकी दोनों बाँहों से अलग करते हुए उतार दिया। अब वो कमर से उपर तक पूरी तरह नंगी खड़ी थी। पता नहीं डर के मारे या ठंड के मारे उसके निप्पल पूरी तरह से खड़े थे।

राज ने पीछे से उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा, “अमित तुम्हें नहीं लगता की हम इस मामले को सुलझा लेंगे।”

“हाँ... हाँ! हम सुलझा लेंगे मिस्टर राज... आप चिंता ना करें।” अमित एक भूखे शिकारी की तरह ज़ूबी के बदन को घूरते हुए कहा।

“ज़ूबी तुम्हें नहीं लगता की हम इस दलदल से बाहर आ जायेंगे।” राज ने उसके स्कर्ट के हुक को खोलते हुए कहा।

“हाँ मिस्टर राज हम जरूर बाहर आ जायेंगे।” ज़ूबी ने उसकी हरकतों का बिना कोई विरोध करते हुए कहा।

ज़ूबी ने अमित की ओर देखा जो कामुक निगाहों से उसके बदन को घुरे जा रहा था। थोड़ी देर में उसने उसका हाथ अपने चूत्तड़ पर रेंगते हुए महसूस किया। उसके एक चूत्तड़ पर राज हाथ फिरा रहा था और दूसरे पर अमित का।

इतने में राज ने अपनी एक अँगुली ज़ूबी की चूत मे घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा। ज़ूबी की निगाहें अपने केबिन के दरवाजे पर लगी हुई थी और वो अल्लाह से दुआ कर रही थी कि उसके केबिन में कोई ना आये। वो सिर्फ हाई हील के सैंडल पहने मेज़ का सहारा ले कर घोड़ी बन गयी थी।

ज़ूबी ने अपने पीछे कपड़ों की सरसराहट सुनी। राज ने थोड़ी देर के लिए अपने हाथ उसके चूत्तड़ से हटा कर अपनी बेल्ट को खोला और अपनी पैंट के बटन खोल कर उसे नीचे सरका दिया। उसने अपने खड़े लंड को ज़ूबी की चूत के छेद पर टिका दिया।

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दास्तान - वक्त के फ़ैसले

Unread post by RohitKapoor » 22 Oct 2014 17:20

“नहीं प्लीज़ नहीं” वो धीरे से बोली।

“अमित हम ये मामला सुलझा कर रहेंगे। मैं जानता हूँ कि जो लोग मेरे लिए कम करते हैं वो हर हाल में मेरा कहा मानेंगे।” कहकर राज ने अपने हाथों से उसके चूत्तड़ को थोड़ा फ़ैलाया और अपने लंड को उसकी चूत में घुसा दिया। ज़ूबी के मुँह से एक चींख निकल पड़ी।

राज ने अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और जोर के धक्के के साथ पूरा लंड उसकी चूत मे डाल दिया। चींख की जगह एक सिस्करी निकल पड़ी ज़ूबी के मुँह से।

“साली कुत्तिया! अपनी टाँगें फ़ैला” राज गुस्से में बोला, “जब तक तू अपनी टाँगें नहीं फ़ैलायेगी, मैं अपना लंड तेरी चूत की जड़ तक कैसे पेलूँगा।”

राज का आधा लंड उसकी चूत मे घुसा हुआ था। बड़ी मुश्किल से ज़ूबी ने अपनी टाँगें फ़ैलायीं। जैसे ही उसकी टाँगें फ़ैलीं, राज ने उसे कंधों से पकड़ा और जोर के धक्के लगाने लगा। उसके हर धक्के के साथ ज़ूबी की चूचियाँ उछल रही थीं।

राज ने उसकी एक चूंची मसलते हुए जोर का धक्का मार कर अपना पानी उसकी चूत मे छोड़ दिया। जब उसके लंड से एक-एक बूँद निकल चुकी थी तो वो अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके चूत्तड़ पर रगड़ने लगा।

ज़ूबी ने थोड़ी राहत की साँस ली। राज वक्त से पहले ही झड़ गया था। वो सीधी हो कर अपने कपड़े पहनने का विचार बना ही रही थी की, “तुम ये क्या कर रही हो?” राज ने पूछा।

“कपड़े पहन रही हूँ और क्या!” ज़ूबी ने जवाब दिया।

“ये अमित के साथ नाइंसाफ़ी होगी ज़ूबी डियर!” राज ने जैसे ही ये कहा ज़ूबी ने अमित की तरफ़ देखा और वो दंग रह गयी। अमित अपने कपड़े उतार कर अपने लंड को सहला रहा था और ज़ूबी के नंगे बदन को देखे जा रहा था।

“तुम जहाँ हो वहीं रुको?” राज ने जैसे उसे आदेश दिया।

ज़ूबी के पास और कोई चारा नहीं था उसकी बात मानने के सिवा। वो उसी अवस्था में सिर्फ सैंडल पहने नंगी खड़ी रही, टेबल का सहारा लिए अपनी गाँड हवा में उठाये हुए। राज के लंड से चूता पानी अभी भी ज़ूबी की जाँघों पर बह रहा था। उसने टेबल से एक टिशू पेपर लिया और पानी को पौंछने लगी।

अमित बिना कोई समय गंवाय उसके पीछे आया और उसके चूत्तड़ चूमने लगा। “मेरी जान... अपनी टाँगों को थोड़ा फ़ैलाओ जिससे मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में डाल सकूँ।” उसने अपना लंड ज़ूबी की चूत के मुहाने पर रखा और एक ही धक्के में अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया।

ज़ूबी ने महसूस किया कि उसका लंड राज के लंड जितना मोटा और लंबा नहीं था। ज़ूबी जानती थी उसका लंड उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता और ये भी जानती थी कि अगर उसे इस जिल्लत से छुटकारा पाना है तो वो उस मर्द के पानी को छुड़ा दे।

यही सोच कर ज़ूबी ने अपनी टाँगों को थोड़ा सिकोड़ और अपनी चूत में उसके लंड को जकड़ लिया। अब वो उसके हर धक्के का साथ अपने कुल्हों को पीछे की ओर धकेल कर साथ दे रही थी।

अमित ने अपने हाथ बढ़ा कर उसके ममे पकड़ लिए और उन्हें मसलते हुए कस के धक्के मारने लगा।

ज़ूबी को अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा था। वो हमेशा से ही एक साधारण और संस्कृति को मानने वाली लड़की रही थी। और आज वो दिन के समय अपने ही ऑफिस में दो लौड़ों से अपने आप को चुदवा रही थी। ऐसा नहीं था कि इतनी भयंकर चुदाई उसे मज़ा नहीं दे रही थी पर इस समय उसका ध्यान अमित का पानी छुड़ाने पर ज्यादा था।

अमित जोर की हुंकार भरते हुए ज़ूबी को चोदे जा रहा था। दो तीन कस के धक्के मारने के बाद उसके लंड ने ज़ूबी की चूत में पानी छोड़ दिया। जैसे ही उसने अपना मुर्झाया लंड बाहर निकाला तो उसके वीर्य की बूँदें ऑफिस के कारपेट पर इधर उधर गिर पड़ी।

ज़ूबी बड़ी मुश्किल से अपनी उखड़ी साँसों पर काबू पा रही थी। उत्तेजना में उसका चेहरा लाल हो चुका था। बड़ी मुश्किल से उसने अपने आप को संभाला और अपने कपड़े पहने। उसने अपने कपड़े पहने ही थे की दरवाजे पर दस्तक हुई, “क्या मैं अंदर आ सकती हूँ?” ज़ूबी की सेक्रेटरी ने पूछा।

बड़ी मुश्किल से ज़ूबी ने कहा, “हाँ आ जाओ।”

ज़ूबी की सेक्रेटरी केबिन में आयी और ज़ूबी से पूछा कि क्या वो खाने का ऑर्डर देना चाहेगी। ज़ूबी ने उसे मना कर दिया की मीटिंग खत्म हो चुकी है और खाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मगर वो जानती थी कि हवा में फ़ैली चुदाई की खुश्बू और उसके बिखरे हुए बाल उसकी सेक्रेटरी को सब कहानी कह देंगे।

ज़ूबी ने अपने आपको इतना अपमानित और गिरा हुआ कभी महसूस नहीं किया था। किस तरह उसकी तकदीर उसके साथ खेल रही थी। एक इंसान उसके जज़बात और शरीर के साथ खेल रहा था और वो मजबूरी वश उसका साथ दे रही थी। अब उसका एक ही मक्सद था की किसी तरह राज की हर बात मानते हुए वो उससे वो टेप हासिल कर ले जो उसने होटल के रूम में रिकॉर्ड कर ली थी।

RohitKapoor
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दास्तान - वक्त के फ़ैसले Part 2

Unread post by RohitKapoor » 22 Oct 2014 17:22

दास्तान - वक्त के फ़ैसले (भाग-२)
लेखक: राज अग्रवाल
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ज़ूबी अपने आप पर बहुत शर्मिंदा थी। मजबूरी में उसे अपने मंगेतर से झूठ बोलना पड़ रहा था कि मिस्टर राज की ऑफिस में देर रात तक मीटिंग चलती है जिस वजह से वो उससे मिल नहीं पा सकती थी। आज उसने फिर झूठ बोला था कि एक अर्जेंट मीटिंग की वजह से वो उससे मिल नहीं पायेगी। कभी उसके दिल में विचार आता कि वो इस्तफा दे दे पर मामले की नज़ाकत को समझते हुए वो चुप रह जाती।

आज राज ने उसे रात को अपने होटल के सुइट में बुलाया था। उसकी बात मानने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं था। जैसे ही उसने होटल में कदम रखा, सबकी निगाहें उस पर जम गयी। सब जानते थे कि जब एक अमीर आदमी किसी लड़की को रात के वक्त बुलाता है तो उसका एक ही मक्सद होता है।

ज़ूबी राज से होटल के रेस्टोरेंट में मिली। राज किसी से फोन पर बात करते हुए अपने पैड पर कुछ लिख रहा था। ज़ूबी ने वही ड्रेस और सैंडल पहनी थी जो राज ने उसे पहनने के लिए कहा था। वो बिना ब्रा और पैंटी पहने उसकी टेबल के पास खड़ी थी।

जब राज की नज़रें ज़ूबी पर पड़ी, “अरे तुम खड़ी क्यों हो, बैठो ना।”

ज़ूबी राज के कहने पर सीट पर बैठ गयी। राज ने फोन पर अपनी बात खत्म की और खाने का ऑर्डर कर दिया। जिस टेबल पर वो बैठे थे वो काफी बड़ी थी और एक सफ़ेद टेबल क्लॉथ से ढकी हुई थी। ज़ूबी राज के बगल की सीट पर बैठ गयी।

राज ने खाना खाते हुए ज़ूबी को बताया कि उसकी एप्लीकेशन का क्या हाल है। उसने बताया कि जो नया टी.वी चैनल वो शुरू करना चाहता है वो एप्लीकेशन की वजह से रुका हुआ था। उसने बताया कि किस तरह उसने अधिकारियों से बातचीत कर ली है और शायद मामला जल्दी ही सुलझ जायेगा।

ज़ूबी शांति से खाना खाते हुए उसकी कहानी सुन रही थी। पर उसका पूरा ध्यान अपने आप में हिम्मत जुटाने में लगा हुआ था कि किस तरह वो राज से उस टेप की बात करे। डर और खौफ़ के मारे उसकी ज़ुबान सूखी जा रही थी। वोदका के पैग भी उसे राहत नहीं दे पा रहे थे। आखिर में उसने हिम्मत जुटाते हुए अपनी हकलाती ज़ुबान से कहा, “राज मैं हर हाल में वो वीडियोटेप वापस पाना चाहती हूँ।”

“जरूर मिल जायेगी” राज ने उसे देखकर मुस्कुराते हुए कहा। “अगर तुम मेरी सहायता करोगी तो वो टेप तुम्हें जरूर मिल जायेगी। पर थोड़े समय के बाद... और मैं तुमसे ये वादा करता हूँ कि वो टेप के बारे में ना तो तुम्हारे ऑफिस में किसी को पता चलेगा और ना ही तुम्हारे मंगेतर को... पर तभी तक जब तक तुम मुझे मजबूर ना कर दो।”

ज़ूबी चुपचाप उसकी बात सुनती रही और जैसा उसने सोच रखा था वही हुआ। राज ने टेबल के नीचे से अपना हाथ उसकी गोरी जाँघों पर रख दिया। अचानक राज ने उसे अपने नज़दीक खींचा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख कर चूसने लगा। ज़ूबी ने उसे रोकने कि चेष्टा नहीं की। राज नाराज़ ना हो जाये, सोच कर वो उसका साथ देने लगी।

ज़ूबी भी अपना मुँह खोल कर उसकी जीभ को चूसने लगी। अब राज ने अपना दूसरा हाथ उसकी शर्ट में डाल दिया और उसकी चूचियों को मसलने लगा। उसके हाथों के स्पर्श ने ज़ूबी के बदन में एक सिरहन सी दौड़ा दी जिससे उसके निप्पल एक दम सख्त हो गये। राज उसकी आँखों में देखते हुए उसकी चूचियों को जोरों से मसल रहा था। जब उसने वेटर को टेबल के नज़दीक आते देखा तो अपना हाथ हटा लिया।

राज ने दोनों के लिए एक और ड्रिंक का ऑर्डर दिया। “अपनी टाँगों को थोड़ा फ़ैलाओ” उसने ज़ूबी की टाँगों को सहलाते हुए कहा।

ना चाहते हुए भी ज़ूबी ने अपनी टाँगें फैला दी। राज के हाथ अब उसकी चूत से खेल रहे थे। वो रह रह कर अपनी हथेली से उसकी चूत को दबा देता। ज़ूबी के शरीर में भी गर्मी आ रही थी। इसका सबूत ये था कि उसकी चूत गीली हो चुकी थी। कई बार राज अपनी गीली हुई अँगुलियों को उसकी स्कर्ट से पौंछ चुका था।

ज़ूबी का दिमाग काम नहीं कर रहा था। दिमाग कह रहा था कि वो राज का साथ ना दे, पर बदन की गर्मी और काम वासना उस पर हावी होती जा रही थी। वो जानती थी कि आज की रात राज उसे चोदेगा और उसके पास उसके साथ सोने के अलावा कोई चारा भी नहीं था। उसे तो हर हाल में चुदवाना था चाहे मन से या बेमन से।

“ओहहहह आहहहह” ज़ूबी के मुँह से सिसकरी निकली। राज अपनी दो अँगुलियाँ उसकी चूत में डाले अंदर बाहर कर रहा था। जैसे-जैसे राज की अँगुली उसकी चूत में घुसती, उतनी ही उसकी वासना और भड़कती। उसकी सिसकरियाँ ये बता रही थी कि अब वो भी चुदवाने कि लिए पूरी तरह तैयार हो गयी है।

राज उसकी हालत देख कर मुस्कुरा रहा था। वो जानता था कि थोड़ी ही देर में ज़ूबी का पानी छूट जायेगा। पर उसका मक्सद ये नहीं था, वो तो उसे बताना चाहता था कि वो अपनी हरकतों से उसे कहीं भी चुदवाने को तैयार कर सकता था।

“ज़ूबी एक काम करो... ये चाबी लो और रूम नंबर २१३ में चली जाओ... और हाँ! जाकर बेड पर रखी ड्रेस और सैंडल पहन लेना जो मैं तुम्हारे लिए लाया हूँ। मैं थोड़ी देर में आता हूँ।” राज ने उसे चाबी पकड़ाते हुए कहा।

ज़ूबी खड़ी होकर ऊपर रूम में जाने के लिये चल दी। जैसे ही वो खड़ी हुई, उसे अपनी चूत से पानी बहता महसूस हुआ। उसकी जाँघें और चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

राज मुस्कुराते हुए ज़ूबी को पीछे से देख रहा था। उसने देखा कि उसकी स्कर्ट उसके चूत्तड़ की गोलाइयों को नहीं छुपा पा रही थी।

ज़ूबी जब कमरे में दाखिल हुई तो उसे बेड पर एक छोटी सी सफ़ेद पैंटी और उतनी ही छोटी ब्रा नज़र आयी। साथ ही उनसे मैचिंग सफ़ेद रंग के बहुत ही हाई हील के सैंडल रखे थे। इन अंडरगार्मेंट्स को देख कर वो समझ गयी कि राज जानबूझ कर इतने छोटे ले कर आया है ताकि उसके मम्मे और चूत्तड़ साफ़ दिखायी दे सके।

रूम के बीचों बीच खड़े होकर उसने अपने काले हाई हील के सैंडल उतारे और फिर अपनी स्कर्ट की ज़िप खोल दी। उसका स्कर्ट फिसल कर नीचे गिर पड़ा। उसने स्कर्ट को अपनी टाँगों से निकाल कर उतार दिया और फिर अपना टॉप भी उतार दिया। कमरे में चलते एयर कंडीशनर की ठंडी हवा ने एक सिरहन सी भर दी उसके शरीर में।

ज़ूबी कमरे में बिछे कार्पेट पर नंगी ही चहल कदमी कर रही थी। उसने बेड पर से कपड़े और सैंडल उठाये और पहनने लगी। वो समझ गयी थी कि राज उसे अपनी काम वासना की पूर्ति के लिए इस्तमाल करना चाहता है। ज़ूबी ये भी जानती थी कि राज के हाथ जब उसके बदन को सहलाते थे तो अपने जज़बतों को नहीं रोक पाती थी। उसकी भी जिस्मनी इच्छा और बढ़ जाती थी।

ज़ूबी ने जैसे ही अपने कपड़े समेट कर साइड की टेबल पर रखे तो राज को कमरे में दाखिल होते देखा। ज़ूबी ने देखा कि राज ने शराब की बोत्तल अपनी बगल में दबा रखी थी और उसके पीछे दो हट्टे तगड़े आदमी सूट पहने कमरे में आ गये।

“ज़ूबी इनसे मिलो... ये हमारे टी.वी चैनल के नये पार्टनर हैं” राज ने कहा।

“करन ये मेरी वकील ज़ूबी है” राज ने उसका परिचय कराया। ज़ूबी चुप चाप खड़ी थी। उसका मन कर रहा था कि वहाँ से भाग जाये पर जानती थी कि वो ऐसा नहीं कर सकती थी। उसने अपने आप को इतना मजबूर कभी नहीं पाया था। उसकी आँखों में पानी आ गया था। ज़ूबी काँपती टाँगों से साइड में पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी।

राज ज़ूबी के पास आ गया और उसकी चूचियों को मसलने लगा। ज़ूबी ने एक बार चाहा कि वो उसके हाथों को झटक दे पर वो ऐसा कर ना सकी, बल्कि उसने महसूस किया कि राज के हाथों का स्पर्श उसे अच्छा लग रहा है और उसके निप्पल एक बार फिर खड़े हो रहे हैं।

राज ने ज़ूबी को कुर्सी पर से उठाया और उसके बदन को सहलाने लगा। फिर उसने अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया। राज अब खुद कुर्सी पर बैठ गया और ज़ूबी को कंधे से नीचे कर के अपनी फैली जाँघों के बीच बिठा दिया। ज़ूबी का चेहरा राज के लंड से कुछ ही इंच के फ़ासले पर था।

“अब मेरे लंड को अपने मुँह में ले कर चूसो।” राज ने अपना लंड उसके गुलाबी होंठों पर रगड़ते हुए कहा।

ज़ूबी को अपने आप से इतनी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि वो अपने आँसू बड़ी मुश्किल से रोक पा रही थी। राज उसके साथ ऐसा व्यवहार कर रहा था जैसे वो कोई वेश्या हो, “प्लीज़ मुझे पराये मर्दों के सामने इतना जलील मत करो” ज़ूबी गिड़गिड़ाते हुए बोली।

राज ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया, बस उसे घूरता जा रहा था।

ज़ूबी ने जब देखा कि उसकी बातों का राज पर कोई असर होने वाला नहीं है तो उसने अपने आप को हालात के सहारे छोड़ दिया।

अब ज़ूबी के पास कोई चारा नहीं था, उसने राज के लंड को अपने हाथों में लिया और अपना मुँह खोल कर उसे चूसने लगी। ज़ूबी के माथे पर पसीना आ गया था पर वो अपना मुँह ऊपर नीचे कर के उसके लंड को जोरों से चूसती जा रही थी।

राज ने अपने हाथ उसके सिर और गर्दन पर टिका रखे थे, पर उसकी निगाहें ज़ूबी के चेहरे पर थी जो उसके लंड को चूस रही थी। राज को उसके मुलायम बदन का स्पर्श अच्छा लग रहा था, कैसे वो बीच में अपनी आँखें ऊपर उठा कर उसे देख लेती थी।

जब वो अपनी जीभ को उसके लंड के चारों तरफ़ घुमाने लगी तब राज को महसूस होने लगा कि वो अब झड़ने वाला है। ज़ूबी के एक हाथ ने उसका लंड नीचे से पकड़ा हुआ था और दूसरा हाथ उसकी जाँघों को पकड़े हुए था। ज़ूबी ने उसके पाँव को अकड़ते देखा और वो समझ गयी कि अब राज झड़ने वाला है।

“चूसती रहो... रुको मत” राज ने उसके सिर को और दबाते हुए कहा।

“हे... भगवान... ओहहहह हाँ आआहहहह” कहकर उसका लंड वीर्य की पिचकारी छोड़ने लगा। उसके कुल्हे ज़ूबी के चेहरे पर गड़े हुए थे। उसने उसके सिर को इतना कस कर पकड़ रखा था कि ज़ूबी को मजबूरी में उसका वीर्य निगलना पड़ रहा था।

जैसे ही उसके पाँव थोड़े ढीले पड़े, ज़ूबी ने अपने गुलाबी होंठ उसके लंड से हटाये और घिसटती हुई सोफ़े पर जाकर बैठ गयी।

“ये मैं क्या कर रही हूँ?” उसे अपने आप से घृणा हो रही थी कि वो ये सब कैसे कर सकती है। पर अभी वो अपनी हालत को संभाल भी नहीं पायी थी कि दो तगड़े मर्दों ने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके दोनों मम्मों को भींचने और मसलने लगे। दोनों उसकी चूचियों को इस तरह चूस रहे थे जैसे दो जुड़वां बच्चे अपनी माँ का स्तन चूसते हैं।

तभी ज़ूबी को राज कि आवाज़ सुनायी दी, “आराम से दोस्तों, सबको मौका मिलेगा इसे चोदने का।”

ज़ूबी की आँखें घबड़ाहट में फट सी गयी और उसे अपनी साँसें घुटती सी महसूस हुई, “हाय अल्लाह ये मेरी सामुहिक चुदाई करेंगे” उसने सोचा, “हाय रब्बा, सब मिलकर चोदेंगे मुझे।”

ज़ूबी आँखें फाड़े उन दो मर्दों को अपनी चूचीयाँ चूसते हुए देख रही थी। पर वो इस बात से भी इनकार नहीं कर सकती थी कि उसके निप्पल तन कर खड़े हो गये थे और उसकी चूत उत्तेजना में गीली हो चुकी थी। उसने तिरछी आँखों से देखा कि अब दोनों मर्द अपने कपड़े उतार रहे थे।

ज़ूबी ने अपने छोटे हाथों को उन मर्दों के कंधों पर रखा और उन्हें हटाने की कोशिश करने लगी, “प्लीज़ रुक जाइये, रुक जाइये।” पर उसकी कोशिश नाकामयाब रही। वो दोनों मर्द उसकी चूचियों को चूसे जा रहे थे।

ज़ूबी का विरोध देख कर राज उसके पास आया और बोला, “ज़ूबी मेरी बात सुनो, तुम्हें इन मर्दों को सहयोग देना होगा? अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो ये तुम्हारे लिए बुरा होगा। मेरे लिए नहीं, तुम्हारे लिए... ये, समझी तुम।”

ज़ूबी की आँखों में आँसू आ गये, उसने राज की आँखों में देखा कि शायद रहम नज़र आ जाये। पर राज की आँखों में रहम नाम की कोई चीज़ नहीं थी। ज़ूबी को मालूम था कि राज की बात मानने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं था। उसके दिल ने कहा कि किसी तरह इस रात को गुज़ार लो।

उसे पता था कि उसकी चूत की आज जम कर धुनाई होने वाली है। उसके बदन की ऐसी दुर्गति बनने वाली है जो उसने सपने में भी ना सोची होगी। वो अपने आप में इन सब के लिए हिम्मत जुटाने लगी।

वैसे तो राज को उसकी सहमती कि जरूरत नहीं थी, फिर भी ज़ूबी ने उसकी और देखते हुए अपनी गर्दन हाँ में हिला दी। दोनों मर्द जो उसकी चूंची चूस रहे थे, एक ने उसका हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड पर रख दिया। ज़ूबी समझ गयी कि वो क्या चाहता है और वो उसके लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।

राज ने जब ज़ूबी को लंड हिलाते देखा तो उसकी नंगी जाँघों को सहलाते हुए बोला, “अब हुई ना अच्छी लड़की वाली बात।”

तभी दूसरा मर्द उसकी टाँगों के बीच आ गया। उसने देखा कि वो अपने खड़े लंड को उसकी गीली हुई चूत पर रगड़ रहा है। उस मर्द ने उसकी टाँगों को थोड़ा ऊपर उठा कर उसके कुल्हे पकड़ लिए और अपने लंबे मोटे लंड को उसकी चूत में घुसाने लगा।

“ओहहहहहह मरररर गयीईईईई।” दर्द के मारे वो चींख पड़ी।

“फाड़ दो इसकी चूत को!” राज ने उस मर्द से कहा। राज जानता था कि ये वकील लड़की की चूत इतने लंबे और मोटे लंड की आदी नहीं है। पर वो ये भी जानता था कि इस खिलाड़ी लड़की की चूत बहुत गहरी है, अगर पूरा घुसाया जाये तो उसकी चूत पूरा लंड निगल लेगी।

वो मर्द जोर लगाकर अपने लंड को उसकी चूत में घुसाने लगा और ज़ूबी को ताज्जुब हुआ जब उसकी चूत फ़ैलते हुए उसके लंड को निगलने लगी। तभी दूसरे मर्द ने उसकी चूंची चूसते हुए उसे लिटा दिया। पहले वाला मर्द अब जोरों से उसकी चूत चोद रहा था। वो इतनी बेरहमी से उसे चोद रहा था कि उसकी चूत में एक दर्द सा भरता जा रहा था।

दूसरे मर्द ने उसकी चूचियों को चूसना बंद किया और उसके चेहरे के पास आ गया। अब वो अपने खड़े लंड को उसके होंठों पर रगड़ रहा था। ज़ूबी अपना मुँह खोलना नहीं चाहती थी, पर उसके पास कोई चारा नहीं था। उसने अपना मुँह खोल कर उस मुसल जैसे लंड को अपने मुँह में ले लिया। एक अजीब सी दुर्गंध उसके नथुनों से टकरायी। पर इन सब बातों पर ध्यान ना देकर वो उस लंड को जोरों से चूसने लगी।

ज़ूबी को पता भी नहीं लगा कि कब उसके शरीर के दर्द और घबड़ाहट ने उत्तेजना और मादकता का रूप ले लिया, और वो झड़ने के कगार पर पहुँच गयी।

“ओहहहहह आआआहहहह ओओओओहहहहह” वो सिसकी और उसकी कमसिन और प्यारी चूत ने पानी छोड़ दिया।

जैसे ही उसकी चूत ने पानी छोड़ा, पहले मर्द के लंड ने उसके मुँह में वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। ना चाहते हुए भी ज़ूबी को उस कसैले वीर्य को पीना पड़ा। जितनी जल्दी हो सकता था वो उस कड़वे पानी को निगल गयी जिससे उसका स्वाद उसकी जीभ पर ज्यादा देर ना रहे।

दूसरा मर्द उसकी चूत में अपने लंड को अंदर बाहर होते देख रहा था। उसने हमेशा से एक नौजवान लड़की को चोदने का सपना देखा था, और आज उसका वो सपना पूरा हो रहा था। उसका मोटा और लंबा लंड ज़ूबी की चूत के अंदर बाहर होता हुआ उसे बहुत अच्छा लग रहा था। जब उसने ज़ूबी के शरीर को अकड़ते और झड़ते देखा तो वो खुद पर काबू ना रख पाया और उसके लंड ने पानी छोड़ दिया।

उस दूसरे मर्द ने अपने अर्ध-मुर्झाये लंड को उसकी चूत के बाहर खींचा और उसके वीर्य की एक जटा सी बाहर को निकल पड़ी। ज़ूबी ने महसूस किया कि वो वीर्य उसकी नंगी जाँघों पर बह रहा था। वो अजीब नज़रों से उस लंड को देख रही थी और सोच रही थी कि उसकी चूत ने किस तरह इस विशाल लंड को अंदर लिया होगा।

उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था। इस भयंकर चुदाई से उसकी साँसें उखड़ चुकी थीं। उस मर्द ने उसे अपनी गोद में उठाया और लेजाकर उसे बिस्तर पर पेट के बल पटक दिया।

ज़ूबी ने महसूस किया कि उसने उसके कुल्हे हवा में उठा दिये और अपना लंड पीछे से उसकी चूत में घुसा दिया। अब वो उसे कुत्तिया कि तरह पीछे से चोद रहा था। ज़ूबी को अपने शरीर के साथ होते इस दुर्व्यवहार पे इतनी शरम आ रही थी कि उसने अपना चेहरा बिस्तर की चादर में छुपा लिया।

पर थोड़ी ही देर में उसका शरीर उसके धक्कों के साथ आगे पीछे हो कर साथ देने लगा। उस मर्द ने उसकी कमर में हाथ डाला, “गुड़िया थोड़ा घुटनों के बल हो जाओ?” जब ज़ूबी ने वैसा किया तो उसने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और मसलने लगा।

जिस तरह से वो उसकी चूचियों को मसल रहा था, ज़ूबी को अपने आप से नफ़रत सी हो रही थी पर उसका शरीर था जो उसकी सोच के विपरीत चल रहा था। उसके निप्पल इतने नाज़ुक थे कि थोड़ी रगड़ा मसली से ही तन कर खड़े हो गये और उसकी टाँगें खुद-ब-खुद उत्तेजना में फ़ैल गयी।

वो मर्द अब एक नयी ताकत से उसे चोद रहा था। वो ज़ूबी कि गाँड के छेद को देख रहा था जो उसके हर धक्के से खुल बंद हो रही थी। उसने अपनी एक अँगुली उसकी गाँड के चेद में डाली और दुगनी ताकत से धक्के लगाने लगा। दस पंद्रह धक्के मारने के बाद उसके लंड ने पानी छोड़ दिया।

एक मर्द उसे चोद कर अलग होता और दूसरा अपने लंड को उसकी चूत में पेल देता। वो अब तो गिनती भी भूलने लगी थी कि उसे कितनी बार किसने चोदा। वो बेहोश सी होने लगी थी।

उसे इतना पता था कि एक लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा है। उसने अपनी अधखुली आँखों से देखा कि होटल के रूम सर्विस स्टाफ से एक जवान लड़का शराब और नाश्ता लेकर रूम में दाखिल हो रहा था।

उस रूम अटेंडेंट ने जब ज़ूबी को इस तरह से चुदते देखा तो उसने अपनी आँखें शरम से झुका ली।

“जो देखा वो पसंद आया क्या?” राज ने उस लड़के से पूछा।

“हाँ सर, ये बहुत सुंदर है, ये किसके लिए काम करती है? मैंने इसे पहले कभी यहाँ नहीं देखा” लड़के ने जवाब दिया।

ज़ूबी समझ गयी कि वो लड़का उसे वेश्या समझ रहा है।

“वैसे ये लड़की कोई रंडी नहीं है... बल्कि ये इस शहर की एक वकील है” राज ने उस लड़के से कहा।

वो लड़का गहरी नज़रों से ज़ूबी को देख रहा था। देख रहा था कि किस तरह एक मूसल लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा है।

“क्या तुम्हारे पास थोड़ा समय है, मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हूँ,” राज ने उस वर्दी धारी लड़के से कहा।

**************************

ज़ूबी होटल रूम के बाथरूम के आइने के सामने खड़ी थी। वो इस तरह झुकी हुई थी कि उसकी चूचियाँ लटक रही थी और उसके भरे और मांसल चूत्तड़ों के पीछे वो रूम अटेंडेंट खड़ा था।

वो लड़का शायद उन्नीस बीस साल का होगा, और शायद उसे चुदाई का अनुभव नहीं था, पर उसका लंड एक दम घोड़े के लंड कि तरह सवारी करने को तैयार था। उसने ज़ूबी से अपना लंड खुद की चूत में डालने को कहा तो ज़ूबी ने उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर रख दिया।

उस अनाड़ी लड़के ने एक ही धक्के में अपना लंड उसकी चूत में घुसाने की कोशिश की और उसका लंड फिसल कर रह गया। उस लड़के ने फिर अपना लंड उसकी चूत के दीवार पर लगाया और इस बार अंदर घुसा दिया। ज़ूबी सिसकी और उसकी चूत ने उसके लंड को जैसे गले लगा लिया। दो धक्कों में उसका लंड पूरा चूत के अंदर था।

जब उसका लंड पूरा अंदर घुस गया तो वो एक कुशल घुड़सवार की तरह उसकी चूत की सवारी करने लगा। ज़ूबी भी उसके धक्कों का साथ अपने कुल्हे आगे पीछे कर के दे रही थी।

उस लड़के ने ज़ूबी के चेहरे पर आये उसके बलों को हटाते हुए कहा कि वो उसका चेहरा आइने में देखना चाहता है। ज़ूबी भी उसे देख रही थी कि किस तरह वो अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था। सबसे बड़ी बात कि बाथरूम के खुले दरवाजे से रूम में बैठे तीनों मर्द उसे चुदवाते देख रहे थे।

वो जवान लड़का उसके कुल्हों को पकड़ कर इतने करारे धक्के मार रहा था कि ज़ूबी की चूत ने थोड़ी देर में ही पानी छोड़ दिया। वो लड़का भी और दो धक्के मार कर उसकी चूत में झड़ गया।

ज़ूबी इस कदर थक गयी थी कि वो अपनी कमजोर टाँगों से खड़ी नहीं हो पायी और बाथरूम की ज़मीन पर लुढ़क गयी। उसकी हालत बेहोशी जैसी थी। तभी उसे राज की आवाज़ सुनायी दी, “ज़ूबी एक अच्छे मेहमान नवाज़ की तरह इसके लौड़े को चाट कर साफ़ करो।”

बिना कुछ कहे ज़ूबी ने अपना मुँह खोला और उस लड़के का लंड अपने मुँह में ले कर चूसने लगी। जब उस लड़के का लंड एक दम साफ़ हो गया तो उसने महसूस किया कि किसी के हाथों ने उसे उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया है। उस रात कितनी बार किसने उसे चोदा उसे याद नहीं था और वो एक गहरी नींद में सो गयी।

कईं घंटे तक ज़ूबी सोती रही। पूरी रात मर्दों ने उसे रगड़ा और मसला था। पूरा शरीर दर्द के मारे कराह रहा था। वो उठी और नहाने के लिये बाथरूम में घुस गयी। वो अपने शरीर से गुनाहों के उन निशानों को मिटाने की कोशिश करने लगी जो उससे जबरदस्ती करवाये गये थे।

ज़ूबी का पूरा शरीर दर्द के मारे कराह रहा था। उसकी चूत सूज कर फूल गयी थी। लंड चूस-चूस के उसके मुँह में और जबड़ों में भी दर्द हो रहा था। उसने गरम पानी से स्नान किया जिससे उसके बदन को राहत मिल सके। अपने बदन को अच्छी तरह टॉवल से पोंछने के बाद वो बेडरूम में आ गयी।

बेडरूम में आते ही उसके दिल की धड़कनें तेज हो गयी। उसके कपड़े कहीं दिखायी नहीं दे रहे थे। शायद दूसरे मर्द उसकी चुदाई कर रहे थे तब राज उसके कपड़ों को अपने साथ ले गया था। राज के द्वारा लाये हुए सफ़ेद हाई हील के सैंडल जरूर वहाँ मौजूद थे क्योंकि पुरी रात चुदते समय वो उन्हें पहने हुए थी और अभी नहाने के पहले ही उसने वो उतारे थे।

ज़ूबी के माथे पर पसीना आ गया। अपने आपको बेइज्जती से बचाने के लिये उसे कुछ सोचना होगा। ज़ूबी ने घड़ी की तरफ़ देखा। सुबह के साड़े सात बज चुके थे। ज़ूबी जानती थी कि वो किसी को अपनी मदद के लिये नहीं बुला सकती थी, वरना उसे कईं सवालों के जवाब देने पड़ सकते थे।

अपने किसी परिचित को बुलाने के बजाय उसने उस नौजवान लड़के को बुलाना उचित समझा जो रात को उसे चोद चुका था। ज़ूबी ने फोन उठाया और रूम सर्विस का नंबर मिलाया। वो अल्लाह से दुआ करने लगी कि वही लड़का फोन उठाये। उसकी किस्मत ने साथ दिया और उसी लड़के ने फोन उठाया। ज़ूबी ने उसे अपने कमरे में आने के लिये कहा।

ज़ूबी रात की घटना याद कर रही थी कि किस तरह वो उस लड़के के सामने घुटनों के बल एक रंडी की तरह उसके लंड को चूस रही थी। ज़ूबी जो एक कामयाब वकील थी... अपने हालत पर उसे रोना आ गया।

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। ज़ूबी ने पैरों में वही सफ़ेद सैंडल पहने और कस कर अपने बदन को टॉवल से ढका और दरवाजे के छेद से देखने लगी। जब उसे तस्सली हो गयी कि आने वाला लड़का रात वाला ही है तो उसने दरवाज़ा खोल दिया। वो नौजवान कमरे के अंदर आ गया।

ज़ूबी उस नौजवान लड़के को, जो सुबह की रोशनी में और भी जवान और गठीला लग रहा था, अपनी दास्तान सुनाने लगी। ज़ूबी की बात सुनकर उस लड़के का लंड तन कर खड़ा हो गया। वो ज़ूबी की बात सुनकर गरमा गया था।

“देखो मेरी डयूटी सुबह दस बजे खत्म होती है, उसके बाद तुम कहो तो मैं तुम्हें कहीं ले जाऊँगा।” उस लड़के ने ज़ूबी को घूरते हुए कहा।

ज़ूबी उसकी बात सुनकर थोड़ा निराश हो गयी, “मैं इतनी देर तक नहीं रुक सकती, क्या कोई तरीका नहीं है कि हम यहाँ से जल्दी निकल सकें” लगभग रोते हुए वो बोली।

“मेरी नौकरी जा सकती है” उसने जवाब दिया, “और मैं अपनी नौकरी खोना नहीं चाहता।”

ज़ूबी की आँखों में आँसू आ गये, “प्लीज़ मेरी मजबूरी को समझो, तुम जो कहोगे मैं करने को तैयार हूँ।” उसे पता था कि जो वो कह रही है उसका मतलब कुछ भी हो सकता था, पर उसके पास और कोई चारा भी नहीं था।

“कुछ भी करोगी?” उसने पूछा।

“हाँ कुछ भी...” ज़ूबी ने कहा।

वो लड़का ज़ूबी के पास आया और ज़ूबी के बदन से लिपटे टॉवल की गाँठ खोल कर उसे ज़मीन पर गिरा दिया। ज़ूबी सीधी खड़ी थी और साथ ही उसकी चूचियाँ भी तन कर खड़ी थी। उसके भरे-भरे मम्मे उसकी साँसों के साथ उठ बैठ रहे थे।

ज़ूबी ने देखा कि उस लड़के के हाथ अब उसकी टाँगों के बीच आ गये और उसकी अंगुलियाँ उसकी चूत के छेद को तलाश कर रही थी। छेद मिलते ही उसने अपनी अंगुलियाँ अंदर घुसा दी। ज़ूबी ने अपनी टाँगें थोड़ी फैला दी जिससे उसकी अँगुली आसानी से अंदर घुस सके।

ज़ूबी ने सहारे के लिये उस लड़के के कंधे को पकड़ लिया और वो उसकी चूत को अपनी अँगुली से चोदने लगा। थोड़ी ही देर में उसकी चूत पानी छोड़ने लगी। उसकी आँखें पूरी कामुक्ता में बंद थी और वो इस हर लम्हे का मज़ा ले रही थी।

उस लड़के को अपने नसीब पर विश्वास नहीं हो रहा था। आज तक उसने सिर्फ़ मोहल्ले की कुछ लड़कियों को ही चोदा था। उसने अपने एक हाथ से उसके मम्मे पकड़ लिये और उन्हें जोरों से मसलने लगा।

आज वो जिस औरत को चोदने जा रहा था वो सही में भरी पूरी औरत थी, सुंदर, गठीला शरीर और गरम। “मेरा लंड बाहर निकालो” उसने ज़ूबी से कहा।